शनिवार, 9 अप्रैल 2011

प्रेम होता ही अतिवादी है | यह बात प्रौड़ होकर ही समझ आती है उसके कि विधाता अमूमन इतना अतिवाद पसंद करता नहीं | खैर, सयाना - समझदार होकर प्यार, प्यार कहाँ रह पाता है !
---- कसप से
---- मनोहर श्याम जोशी

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